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5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए, निर्यात सकल घरेलू उत्पाद के 20% तक बढ़ना चाहिए 

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आयोजना, संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

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भारत 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था: संदर्भ

  • हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, निर्यात हिस्सेदारी आदर्श रूप से 25% , किंतु कम से कम 20% तक बढ़नी चाहिए
  • उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत रुपया निर्यात के लिए अच्छा होगा।

 

निर्यात 20% तक बढ़ना चाहिए: प्रमुख बिंदु

  • 25% क्यों: हमें तेल के अपने आयात को सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता है। अतः, हमारे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी ताकि हम अपने आयात को वित्तपोषित करना जारी रख सकें और आने वाले दिनों में रुपये को मजबूत कर सकें।
  • रुपया कितने मजबूत निर्यात का समर्थन करता है: एक मजबूत मुद्रा एक राष्ट्र की क्षमता को प्रदर्शित करता है एवं सदैव निर्यात के लिए अच्छा सिद्ध होगा, क्योंकि भारत वस्तुओं का शुद्ध आयातक है। एक मजबूत मुद्रा भारतीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है।
    • विशेष रूप से, यह माना जाता है कि कमजोर मुद्रा निर्यात का समर्थन करती है। स्पष्टीकरण के लिए यहां देखें।
  • मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का निर्यात 410 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा
    • फरवरी 2022 तक, भारतीय निर्यात 374 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

 

निर्यात 20% तक बढ़ना चाहिए: आवश्यक कदम

  • समय की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आर्थिक कानूनों का पुनः अभिमुखीकरण।
  • हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने के लिए हमारे ‘बढ़त’ का लाभ उठाना।
    • परिणाम मूलक सुलाभ
    • जनसांख्यिकीय लाभांश
    • सुशासन,  एवं
    • उद्योग में नवाचार को प्रोत्साहित करना
  • निजी उद्योग के लिए 3-बिंदु कार्यवाही का आह्वान;
    • वर्तमान वार्ताओं में सक्रिय  रूप से भाग लेना, – एफटीए द्विपक्षीय यातायात है; हमें मांगकर्ता बनना होगा, उनकी मांगों को भी समायोजित करना होगा
    • कार्यों के माध्यम से, हमारे नागरिकों में गर्व की भावना पैदा करना, कि हमारे उत्पाद वैश्विक उत्पादों के बराबर या उससे भी बेहतर हैं। फर्क को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें! वे दिन गए जब आयात का तात्पर्य बेहतर था, “मेड इन इंडिया” मार्क को प्रत्येक श्रेणी में वैश्विक ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।
    • आकांक्षी जिलों  एवं टियर 2 तथा टियर 3 शहरों के विकास पर ध्यान दें। ये भविष्य के निर्यात केंद्र हो सकते हैं।

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5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था: आगे की राह 

  • उद्योग, सरकार एवं नागरिकों को वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाकर, हमारे सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण का हिस्सा बढ़ाकर तथा वैश्विक सेवा व्यापार में शीर्ष 3 देशों में पहुंचने का लक्ष्य बनाकर एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। ।

 

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