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‘द हिंदू’, ‘पीआईबी’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ एवं अन्य समाचार पत्रों का दैनिक सार: 29 जून, 2021

दैनिक समाचार सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को गति प्रदान करेंगे एवं ये समसामयिक विषयों को व्यापक रूप से समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां हमने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इत्यादि समेत विभिन्न श्रेणियों से संबंधित अधिकांश प्रसंगों को समाविष्ट किया है।

 

1. अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय दिवस 2021

समाचारों में क्यों है?

29 जून को प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मुख्य बिंदु हैं:

– यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र की एक पहल है जिसका उद्देश्य पृथ्वी पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों को बढ़ावा देना, संरक्षण रणनीतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना एवं ग्रह की उल्लेखनीय प्रचुर विविधता का उत्सव मनाना है।

–  उष्ण कटिबंधों की आरंभिक स्थिति रिपोर्ट 29 जून 2014 को बारह प्रमुख उष्णकटिबंधीय अनुसंधान संस्थानों के मध्य सहयोग की परिणति के रूप में विमोचित किया गया था।

– रिपोर्ट इस उत्तरोत्तर महत्वपूर्ण क्षेत्र पर एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

– रिपोर्ट के विमोचन की वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2016 में संकल्प ए/आरईएस/70/267 को अंगीकृत किया, जिसमें घोषित किया गया कि प्रत्येक वर्ष 29 जून को उष्ण कटिबंधों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाना है।

– उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के समक्ष प्रकट होने वाली विशिष्ट चुनौतियों, विश्व के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों के दूरगामी प्रभाव एवं सभी स्तरों पर जागरूकता बढ़ाने एवं उष्णकटिबंधीय देशों द्वारा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में अदा की जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए अभिहित किया गया था।

– ‘उष्ण कटिबंधों की स्थिति रिपोर्ट 2021’ के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय दिवस की विषय वस्तु इस वर्ष ‘डिजिटल डिवाइड इन ट्रॉपिक्स’ है।

उष्ण कटिबंधों के बारे में

– उष्ण कटिबंध पृथ्वी का एक क्षेत्र है, जिसे मोटे तौर पर कर्क रेखा एवं मकर रेखा के मध्य के क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है।

–  यद्यपि स्थलाकृति एवं अन्य कारक जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं, उष्णकटिबंधीय स्थल सामान्य तौर पर उष्ण होते हैं एवं दिन-प्रतिदिन के तापमान में थोड़ा मौसमी परिवर्तन का अनुभव करते हैं।

– उष्ण कटिबंधों की एक महत्वपूर्ण विशेषता भूमध्य रेखा के समीप आद्र आंतरिक क्षेत्रों में वर्षा की व्यापकता है, एवं यह कि भूमध्य रेखा से दूरी के साथ वर्षा में मौसमी वृद्धि होती है।

‘द हिंदू’, ‘पीआईबी’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ एवं अन्य समाचार पत्रों का दैनिक सार: 29 जून, 2021_40.1

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2. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की

समाचारों में क्यों है?

वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित आठ उपायों के पश्चात कोविड प्रभावित क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 जून, 2021 को 6.28 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की।

प्रमुख बिंदु हैं:

– निशुल्क वीजा, ट्रैवल एजेंसियों के लिए ऋण

वीजा जारी होने के साथ ही, प्रथम पांच लाख पर्यटक वीजा निशुल्क जारी किए जाएंगे। इस वीजा प्रोत्साहन पर सरकार पर अनुमानतः 100 करोड़ रुपये का  व्यय आएगा। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र के लिए ऋण प्रतिभूति योजना की भी घोषणा की क्योंकि यह कोविड -19 महामारी से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक रहा है। योजना के अंतर्गत ट्रैवल एजेंसियों को 100 प्रतिशत प्रतिभूति (गारंटी) के साथ 10 लाख रुपये एवं क्षेत्रीय पर्यटक गाइड को 1 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाएगा।

– एनईआईए के लिए 33,000 करोड़ रुपये

वित्त मंत्रालय ने एक ऐसी निधि की घोषणा की जो राष्ट्रीय निर्यात बीमा खाता (एनईआईए) को पांच वर्षों में परियोजना निर्यात के अतिरिक्त 33,000 करोड़ रुपये के आर्थिक उत्तरदायित्व लेने में सक्षम बनाएगा। एनईआईए एक्जिम बैंक के माध्यम से अल्प साख वाले निर्यातकों एवं ऋण ग्राहियों को प्रस्तावित  करने हेतु क्रेताओं के साख के लिए आच्छादन की सुविधा प्रदान करता है।

– स्वास्थ्य आधारिक अवसंरचना का विस्तार

क्रेडिट गारंटी योजना एवं 23,220 करोड़ रुपये की राशि एक वर्ष के लिए स्वास्थ्य सेवा आधारिक अवसंरचना के विस्तार के लिए उद्दिष्ट की गई है। वित्त पोषण का उद्देश्य आईसीयू बिस्तरों की संख्या में वृद्धि करना एवं उपकरण एवं तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की उपलब्धता में वृद्धि करना है। यह बाल एवं शिशु चिकित्सा देखभाल के संदर्भ में स्वास्थ्य सेवा आधारिक अवसंरचना की उद्यतता पर बल देगा।

– 1.1 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना 

कोविड प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1.1 लाख करोड़ रुपये की एक ऋण गारंटी योजना की घोषणा की गई। 1.1 लाख करोड़ रुपये में से 50,000 करोड़ रुपये स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रदान किए जाएंगे। इससे 25 लाख लाभार्थी लाभान्वित होंगे क्योंकि वे सूक्ष्म-वित्त संस्थानों (एमएफआई) के माध्यम से 1.25 लाख रुपये तक  के ऋण ले सकेंगे। सार्वजनिक एवं निजी दोनों अस्पताल तीन वर्ष की प्रतिभूति अवधि के साथ अधिकतम 100 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

– पीपीपी परियोजनाएं, डिस्कॉम्स, भारतनेट

सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं की त्वरित स्वीकृति के लिए नई प्रक्रिया अपनाई जा रही है। डिस्कॉम्स के परिष्कार के लिए 3.03 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए। गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में सुधार के लिए भारतनेट को अतिरिक्त 19,041 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

– उर्वरक सहायिकी, पीएमजीकेएवाई

उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सहायिकी (एनबीएस) को बढ़ाकर 42,275 करोड़ रुपये कर दिया गया। डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) एवं एनपीके-आधारित सम्मिश्र उर्वरक आदि के लिए हितधारकों को अतिरिक्त 14,775 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।

Daily Gist of ‘The Hindu’, ‘PIB’, ‘Indian Express’ and Other Newspapers: 29 June, 2021

 

3. गुजरात मद्य निषेध अधिनियम, 1949

समाचारों में क्यों है?

गुजरात मद्य निषेध अधिनियम, 1949 को बॉम्बे मद्य निषेध अधिनियम के रूप में लागू होने के सात दशक से अधिक समय पश्चात गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है। न्यायालय को याचिकाओं की अनुरक्ष्यता पर शीघ्र अपना निर्णय देना है।

गुजरात मद्य निषेध अधिनियम, 1949 के बारे में

– तत्कालीन बॉम्बे प्रांत द्वारा बॉम्बे मद्य निषेध अधिनियम, 1949 के रूप में मादक द्रव्यों एवं स्वापक द्रव्यों के पूर्ण निषेध से संबंधित कानून का कायापलट करने के लिए प्रस्तुत किया गया था।

– यह बॉम्बे राज्य में शराबबंदी को प्रोत्साहन देने एवं प्रवर्तित करने से संबंधित एक अधिनियम है।

– बॉम्बे राज्य को 1960 में महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्यों में विभाजित किया गया था।

– गुजरात ने 1960 में शराबबंदी नीति को अपनाया एवं बाद में इसे और अधिक कठोरता के साथ लागू करने के लिए चयनित किया।

– 2011 में, इसने अधिनियम का नाम परिवर्तित कर गुजरात मद्य निषेध अधिनियम कर दिया।

– मद्य निषेध पर पहला संकेत बॉम्बे आबकारी अधिनियम, 1878 के माध्यम से था। यह अधिनियम 1939 एवं 1947 में किए गए संशोधनों के माध्यम से एवं अन्य वस्तुओं एवं मद्य निषेध के रूपों पर शुल्क लगाने से संबंधित है।

– इस कानून के पीछे तर्क यह है कि राज्य सरकार का कहना है कि वह “महात्मा गांधी के आदर्शों एवं सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध है एवं मद्यपान के खतरे को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प रखती है।”

नीचे दिए गए तर्क इंगित करते हैं कि इस तरह के प्रतिबंध समय की आवश्यकता थी:

– संविधान सभी राज्य सरकारों पर “शराब के उपभोग को सीमित करने, यदि नहीं तो नियंत्रित करने” का उत्तरदायित्व देता है (अनुच्छेद 47)।

– शराब के नियमित एवं अत्यधिक सेवन को हतोत्साहित करने के लिए सख्त राज्य विनियमन अनिवार्य है।

– शराब पारिवारिक संसाधनों एवं संचयों को निरावृत कर देती है एवं महिलाओं एवं बच्चों को इसके सर्वाधिक भेद्य पीड़ितों के रूप में छोड़ देती है। कम से कम जहां तक पारिवारिक इकाई का संबंध है एक सामाजिक कलंक अभी भी शराब के सेवन से संबंधित है।

– भेद्य व्यक्ति, या तो उम्र के कारण या नशे के प्रति झुकाव या साथियों के दबाव की विशेषता के रूप में, अधिक से अधिक, इस प्रलोभन के आगे झुक जाते हैं।

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4. जम्मू ड्रोन हमला

समाचारों में क्यों है? 

हाल ही में, ड्रोन का इस्तेमाल पहली बार जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र के अंदर विस्फोटक उपकरणों को गिराने के लिए किया गया था।

प्रमुख बिंदु हैं:

– विगत दो वर्षों में, भारतीय क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद एवं मादक द्रव्यों की तस्करी के लिए पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन तैनात किए गए हैं।

– ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं एवं इसलिए किसी भी रडार प्रणाली द्वारा इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।

– सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में पाकिस्तान से लगी सीमा पर 167 ड्रोन के निशान अंकित किए गए एवं 2020 में ऐसे 77 निशान अंकित किए गए।

– ड्रोन तकनीक के तीव्र गति से प्रसार एवं हाल के वर्षों में इसके वैश्विक बाजार में घातांकी वृद्धि के साथ, विश्व के सर्वाधिक सुरक्षित शहरों में भी ड्रोन हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

– ड्रोन सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं, विशेष रूप से संघर्ष क्षेत्रों में जहां गैर-राज्य कर्ता सक्रिय हैं एवं प्रौद्योगिकी तक  सुगम अभिगम्यता रखते हैं।

ड्रोन हमलों में वृद्धि के कारण हैं:

– इस प्रसार का प्राथमिक कारण यह है कि पारंपरिक हथियारों की तुलना में ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं एवं फिर भी कहीं अधिक विनाशकारी परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

– युद्ध के उद्देश्यों के लिए ड्रोन का उपयोग करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे सुदूर से नियंत्रित किया जा सकता है एवं आक्रमणकारी पक्ष के किसी भी सदस्य को खतरे में नहीं डालता है।

– यह सुगमता से प्राप्त होने वाली, सुगम रूप से संचालित, एवं सिद्ध क्षति क्षमता युक्त है जो किसी भी देश के लिए अपने बलों को ड्रोन-विरोधी युद्ध तकनीक से समर्थ बनाना महत्वपूर्ण बनाती है।

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5. फ्रैंकलिन टेम्पलटन मामला – सेबी

समाचारों में क्यों है?

28 जून 2021 को, फ्रैंकलिन टेम्पलटन (एफटी) को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) से अंतरिम अनुतोष प्रदान किया गया है।

मुख्य बिंदु हैं:

– सैट ने एफटी पर भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश पर रोक लगा दी जिसने इसे नई ऋण योजना प्रारंभ करने से प्रतिबंधित कर दिया था।

– ट्रिब्यूनल ने सेबी के फ्रैंकलिन टेम्पलटन से 512 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश एवं एफटी पर तीन सप्ताह में 250 करोड़ रुपये जमा करने के उसके निर्देश पर भी अस्थायी रोक लगा दी।

– फ्रैंकलिन टेम्पलटन-सेबी के मामले पर अगली सुनवाई 30 अगस्त 2021 को होगी। सैट का आदेश उसके अगले आदेश तक अनुप्रयोज्य रहेगा।

फ्रैंकलिन टेम्पलटन के बारे में

यह एक वैश्विक निवेश फर्म है जिसे 1947 में न्यूयॉर्क शहर में स्थापित किया गया था। यह टिकर प्रतीक बेन के अंतर्गत न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है। कंपनी का नाम बेंजामिन फ्रैंकलिन के सम्मान में रखा गया है।

योजनाएं हैं:

छह योजनाएं अर्थात् फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनेमिक एक्रुअल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, एवं फ्रैंकलिन इंडिया इनकम अपॉर्चुनिटीज फंड, एक साथ प्रबंधन के अंतर्गत परिसंपत्ति के रूप में अनुमानित रूप से 25,000 करोड़ रुपये थे।

 

6. भारत के साथ सीमा के समीप चीन नई सेनाएं खड़ा कर रहा है

समाचारों में क्यों है?

हाल ही में, चीनी सेना ने उच्च तुंगता वाले युद्ध के लिए स्थानीय तिब्बती युवाओं को सम्मिलित करते हुए नई  सैन्य इकाइयाँ  निर्मित की हैं।

मुख्य बिंदु हैं:

– “पीएलए ने तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में यातुंग काउंटी के तहत चुम्बी घाटी में, एक नई सैन्य व्यवस्था तैनात की है, जिसे मिमांग चेटन (एमसी) के रूप में जाना जाता है, ” एक सूत्र ने कहा।

– एमसी में पीएलए द्वारा भर्ती एवं प्रशिक्षित स्थानीय तिब्बती युवा सम्मिलित हैं।

“एमसी के दो बैच, जिनमें से प्रत्येक में लगभग 100 युवा सम्मिलित हैं, को भर्ती किया गया है, जिसमें प्रथम 100 ने अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है एवं वर्तमान में चुंबी घाटी में विभिन्न स्थानों जैसे उतुंग, चीमा, रिनचेंगंग, पीबी थांग एवं फारी में तैनात हैं ” सूत्र ने कहा।

– दूसरा बैच वर्तमान में फारी में प्रशिक्षण ले रहा है।

– पीएलए ने स्थानीय लोगों की अनुकूलन क्षमता, भाषा का ज्ञान एवं मौसम की स्थिति एवं सामान्य इलाके के बारे में जागरूकता को ध्यान में रखते हुए अरुणाचल प्रदेश की ओर 11,000 फीट एवं लद्दाख में काराकोरम के करीब 18,000 फीट के मध्य की तुंगता के साथ एसटीएयू का निर्माण किया।

– यह इन सैनिकों को अधिकांशतः सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात करके अपने लाभ के लिए क्षेत्र के साथ स्थानीय लोगों की परिचितता का फायदा उठाना चाहता है, सूत्र ने कहा।

–  वर्तमान में यूनिट कार्मिकों के पास न तो वर्दी है एवं न ही रैंक। नई इकाई की टुकड़ियों को अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद तिब्बती भिक्षुओं के आशीर्वाद के लिए ले जाया जाता है। चीन के एक साम्यवादी राष्ट्र होने के नाते, ऐसी कोई पूर्व प्रथा नहीं है। “यह संभवतः तिब्बत क्षेत्र में कुछ लाभ प्राप्त करने के लिए पीएलए की एक नई रणनीति है।”

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