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‘द हिंदू’, ‘पीआईबी’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ एवं अन्य समाचार पत्रों का दैनिक सार: 22 जून, 2021

दैनिक समाचार सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को गति प्रदान करेंगे एवं ये समसामयिक विषयों को व्यापक रूप से समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां हमने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इत्यादि समेत विभिन्न श्रेणियों से संबंधित अधिकांश प्रसंगों को समाविष्ट किया है।

1. उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम

समाचारों में क्यों है?

ई-कॉमर्स में अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने 23 जुलाई 2020 से उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को अधिसूचित किया था।

मुख्य बिंदु हैं:

– हालांकि, इन नियमों को अधिसूचित किए जाने के पश्चात से, सरकार को ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक धोखाधड़ी एवं अनुचित व्यापार प्रथाओं के विरुद्ध शिकायत करने वाले पीड़ित उपभोक्ताओं, व्यापारियों एवं संघों से अनेक अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।

– इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की व्यापकता ने बाजार में उपभोक्ता एवं व्यावसायिक भावनाको नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जिससे कई लोगों को अत्यधिक परेशानी एवं पीड़ा हुई है।

– यह देखा गया कि ई-कॉमर्स में नियामक निरीक्षण का स्पष्ट अभाव था जिस हेतु तत्काल कुछ कार्रवाई की आवश्यकता थी।

– इसके अतिरिक्त, ई-कॉमर्स मंच की त्वरित वृद्धि ने विपणन स्थल ई-कॉमर्स संस्थाओं की अनुचित व्यापार प्रथाओं को भी दायरे में लाया है, जो कुछ विक्रेताओं को बढ़ावा देने के लिए खोज परिणामों में हेरफेर करने, कुछ विक्रेताओं के लिए अधिमान्य व्यवहार, अप्रत्यक्ष रूप से विक्रेताओं को अपने मंच पर संचालित करना, उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद का अतिक्रमण करना, समाप्ति तिथि के समीप की वस्तुएं बेचना,आदि में संलग्न हैं।

– उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उनके शोषण को रोकने एवं बाजार में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए, भारत सरकार उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में प्रस्तावित संशोधनों का एक प्रारूप साझा कर रही है।

– प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में पारदर्शिता लाना एवं एवं प्रचलित अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए नियामक व्यवस्था को और सशक्त करना है।

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2. भारत हरित हाइड्रोजन पहल पर शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा

समाचारों में क्यों है?

भारत हरित हाइड्रोजन पहल पर दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शिखर सम्मेलन 22 जून, 2021 से  प्रारंभ होगा जिसमें ब्रिक्स राष्ट्र  सम्मिलित होंगे

मुख्य बिंदु हैं:

– प्रतिष्ठित कार्यक्रम उनके संबंधित ग्रीन हाइड्रोजन पहल एवं विचारों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है कि इसे अपने देशों में अगले स्तर परकिस प्रकार ले जाया जाए।

– यह कार्यक्रम वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा एवं बुधवार को समाप्त होगा। यह भारत के सर्वाधिक वृहद विद्युत उत्पादक एवं वैश्विक ऊर्जा कंपनियों में से एक, एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा संचालित किया जाएगा।

आभासी शिखर सम्मेलन ब्रिक्स देशों के सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क, नीति निर्माताओं एवं प्रमुख हितधारकों को ऊर्जा मिश्रण में हाइड्रोजन के भविष्य पर विचार-विमर्श और चर्चा करने के लिए लाएगा

Daily Gist of ‘The Hindu’, ‘PIB’, ‘Indian Express’ and Other Newspapers: 22 June, 2021

 

3. गेहूं एवं चावल में पोषक तत्वों की हानि

समाचारों में क्यों है?

हाल ही में, भारतीय अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) एवं विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के तहत विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं ने पाया कि भारत में चावल एवं गेहूं की खेती में जस्ता एवं लोहे के अन्न घनत्व में कमी आई है।

मुख्य बिंदु हैं:

– शोधकर्ताओं ने चावल (16 किस्मों) एवं गेहूं (18 किस्मों) के बीज को आईसीएआर के कृषिजोपजाति भंडार गृहों में निर्मित किए गए जीन बैंक से एकत्र किया।

– 1960 के दशक में जारी चावल की किस्मों के कृषिजोपजाति में जिंक एवं आयरन की सांद्रता 27.1 मिलीग्राम/किलोग्राम और 59.8 मिलीग्राम/किलोग्राम थी। यह 2000 के दशक में क्रमशः 20.6 मिलीग्राम/किलोग्राम और 43.1 मिलीग्राम/किलोग्राम तक कम हो गई।

– गेहूं में सांद्रता: 1960 के दशक की कृषिजोपजाति में जस्ता एवं लोहे की सांद्रता 33.3 मिलीग्राम / किग्रा और 57.6 मिलीग्राम / किग्रा थी, जो 2010 के दौरान जारी की गई कृषिजोपजाति में क्रमशः 23.5 मिलीग्राम / किग्रा एवं 46.4 मिलीग्राम / किग्रा तक अवनत हो गई।

कमी का कारण:

– अनुपात ह्रास प्रभाव’ जो उच्च अन्न उत्पादन के प्रत्युत्तर में पोषक तत्वों कीसांद्रता में कमी के कारण होता है।

– इसका तात्पर्य यह है कि उपज में वृद्धि की दर पौधों द्वारा पोषक तत्व ग्रहण करने की दर से प्रतिकारित नहीं की जाती है। साथ ही, मृदा आलंबी पौधों में पौध-उपलब्ध पोषक तत्व कम हो सकते हैं।

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4. पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषकों की सहायता के लिए नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को खेतों से जोड़ेगा केंद्र

समाचारों में क्यों है?

पूर्वोत्तर भारत में छोटे एवं सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को खेतों से संलग्न करने की दिशा में कार्य कर रही है। यह मुख्य रूप से बायोटेक-किसान कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा।

प्रमुख बिंदु हैं:

– जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक विशेष कॉल जारी किया जो कृषकों के स्थानीय मुद्दों को समझने एवं उन्हें वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने में सहायता करेगा।

– कार्यक्रम विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगा क्योंकि यह मुख्य रूप से कृषि प्रधान है जहां इसका 70% कार्य बल कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आजीविका के लिए सम्बद्धरहा है।

– छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए कृषि के साथ नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को जोड़ने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर क्षेत्र में बायोटेक-किसान कार्यक्रम लागू किया जाएगा।

– पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के 1.5% खाद्यान्न का उत्पादन करता है एवं अपने घरेलू उपभोग के लिए खाद्यान्न का शुद्ध आयातक बना हुआ है।

– इस क्षेत्र में स्थान विशिष्ट फसलों, बागवानी एवं वृक्षारोपण फसलों, मत्स्य पालन तथा पशुधन उत्पादन को बढ़ावा देकर कृषि जनसंख्या की आय में वृद्धि करने की अप्रयुक्त क्षमता है।

– कार्यक्रम के तहत, एनईआर में केंद्रित संस्थान भारत के वैज्ञानिक संस्थानों एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों या कृषि विज्ञान केंद्रों आदि के साथ सहयोग करेंगे।

 

5. एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस)

समाचारों में क्यों है?

ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की एकीकृत विद्युत विकास योजना के तहत हाल ही में हिमाचल प्रदेश के सोलन में 50 किलोवाट क्षमता के सोलर रूफटॉप का उद्घाटन किया गया।

प्रमुख बिंदु हैं:

– यह परियोजना भारत सरकार की शहरी वितरण योजना में परिकल्पित सरकार की ‘गो ग्रीन’ पहल को और अधिक पुष्ट करती है।

– यह योजना एटी एंड सी घाटे को कम करने; आईटी-सक्षम ऊर्जा लेखा/लेखा परीक्षा प्रणाली की स्थापना, मीटर की खपत के आधार पर बिल ऊर्जा में सुधार एवं संग्रहण दक्षता में सुधार लाने में सहायता करेगी।

आईपीडीएस के बारे में:

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।

– 2014 में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा निम्न उद्देश्यों के साथ आरंभ किया गया:

– शहरी क्षेत्रों में उप-पारेषण एवं वितरण नेटवर्क को मजबूत करना।

– शहरी क्षेत्रों में वितरण ट्रांसफार्मर/फीडर/उपभोक्ताओं की मीटरिंग।

– वितरण क्षेत्र की आईटी सक्षमता एवं आर-एपीडीआरपी के तहत वितरण नेटवर्क को मजबूत करना।

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6. इबोला का प्रकोप

समाचारों में क्यों है?

गिनी में इबोला का एक प्रकोप फरवरी में  प्रारंभ हुआ था, जिसमें 16 लोग संक्रमित हुए थे एवं 12 लोगों की मृत्यु हुई थी, जिसे डब्ल्यूएचओ ने समाप्त घोषित कर दिया है।

मुख्य बिंदु हैं:

– 2014-2016 में इबोला के प्रकोप से 11,300 व्यक्तियों की मृत्यु हुई, जिसमें अधिकांशत: गिनी, सिएरा लियोन एवं लाइबेरिया में थे।

– मई 2021 में, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) ने आधिकारिक तौर पर 12वें इबोला प्रकोप की समाप्ति की घोषणा की।

– इबोला विषाणु रोग (ईवीडी), जिसे पहले इबोला रक्तस्रावी बुखार के रूप में जाना जाता था, मनुष्यों में एक गंभीर, प्रायः घातक व्याधि है।

– संचरण: विषाणु वन्य जीवों के माध्यम से व्यक्तियों में प्रसारित होता है एवं मानव-से-मानव संचरण के माध्यम से मानव आबादी में प्रसारित होता है।

– ईवीडी मामले में औसत मृत्यु दर लगभग 50% है। पिछले प्रकोपों ​​​​में मृत्यु दर मामले 25% से 90% तक विचरित है।

– रोकथाम: प्रकोपों ​​​​को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए सामुदायिक अनुबंध महत्वपूर्ण है। उचित प्रकोप नियंत्रण केस प्रबंधन, अवेक्षण एवं संपर्क अनुरेखण, उचित प्रयोगशाला सेवातथा सामाजिक गतिशीलता पर निर्भर करता है।

– उपचार: पुनर्जलीकरण के साथ प्रारंभिक सहायक देखभाल, रोगसूचक उपचार उत्तरजीविता में सुधार करता है। वायरस को निष्क्रिय करने के लिए अभी तक कोई अनुज्ञा प्राप्त उपचार सिद्ध नहीं हुआ है, किंतु अनेक प्रकार के रक्त, प्रतिरक्षाविज्ञानी एवं दवा उपचार विकासाधीन हैं।

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