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अलंकार से जुड़े UPTET के महत्वपूर्ण प्रश्न | 17th December 2019

अलंकार से जुड़े UPTET के महत्वपूर्ण प्रश्न | 17th December 2019_30.1

हिंदी भाषा TET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTETKVS ,NVSDSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.TEACHERSADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।

Q1. ‘बड़े न हुजे गुनन बिनु विरद बडाई पाय।
कहत धतूरे सों कनक गहनों गढों न जाय।।’
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन – सा अलंकार है?

(a) अतिशयोक्ति
(b) प्रतिवस्तूपमा
(c) अर्थांतरन्यास
(d) विरोधाभास

Q2. ‘चरण कमल बंदौ हरि राई’ इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(a) श्लेष
(b) उपमा
(c) रूपक
(d) अतिशयोक्ति

Q3. ‘काव्यशोभाकरान् धर्मानलंकारान् प्रचक्षते’ अलंकार की उपर्युक्त परिभाषा है –
(a) दण्डी
(b) भामह
(c) उद्भट
(d) जयदेव

Q4. कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
या खाए बौराय जग वा पाए बौराय॥
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?

(a) उपमा
(b) यमक
(c) अनुप्रास
(d) श्लेष

Q5. ‘अभिधान प्रकाश विशेषा एव चालंकारा’ अलंकार के संबंध में किसका कथन है?
(a) दण्डी
(b) यामह
(c) उद्भट
(d) रुद्रट

Q6. ‘नवल सुंदर श्याम शरीर’ में कौन-सा अलंकार है?
(a) उल्लेख
(b) उपमा
(c) रूपक
(d) अतिशयोक्ति

Q7. अलंकार को वर्णन की एक प्रणाली किसने कहा है?
(a) रामचन्द्र शुक्ल
(b) डॉ. नगेंद्र
(c) पंत
(d) इनमें से कोई नहीं

Q8. जब वर्गों की आवृत्ति एक निश्चित क्रम में होती है तो होता है –
(a) यमक अलंकार
(b) अनुप्रास अलंकार
(c) श्लेष अलंकार
(d) वक्रोक्ति अलंकार

Q9. “अलंकार यथार्थ में वर्णन की एक शैली है, वर्णन का विषय नहीं है” यह कथन किसका है?
(a) रामचन्द्र शुक्ल
(b) श्यामसुन्दर दास
(c) केशवदास
(d) सुमित्रानंदन पंत

Q10. “दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह सांध्य-सुन्दरी परी सी
धीरे-धीरे-धीरे”
इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

(a) उपमा
(b) रूपक
(c) मानवीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं

Solutions

S1. Ans.(c)
Sol. अर्थान्तरन्यास अलंकार :-जब किसी सामान्य कथन से विशेष कथन का अथवा विशेष कथन से सामान्य कथन का समर्थन किया जाय, तो ‘अर्थान्तरन्यास अलंकार’ होता है।
उदाहरणार्थ- बड़े न हूजे गुनन बिनु, बिरद बड़ाई पाय।
कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाय।
यहाँ सामान्य कथन का समर्थन विशेष बात से किया गया है। पूर्वार्द्ध में सामान्य बात कही गयी है और उसका समर्थन विशेष बात कहकर किया गया है।


प्रतिवस्तूपमाा अलंकार:-जहाँ उपमेय और उपमान के पृथक-पृथक वाक्यों में एक ही समानधर्म दो भित्र-भित्र शब्दों द्वारा कहा जाय, वहाँ ‘प्रतिवस्तूपमा अलंकार’ होता है।
उदाहरणार्थ- सिंहसुता क्या कभी स्यार से प्यार करेगी ?
क्या परनर का हाथ कुलस्त्री कभी धरेगी ?
यहाँ दोनों वाक्यों में पूर्वार्द्ध (उपमानवाक्य) का धर्म ‘प्यार करना’ उत्तरार्द्ध (उपमेय-वाक्य) में ‘हाथ धरना’ के रूप में कथित है। वस्तुतः दोनों का अर्थ एक ही है। एक ही समानधर्म सिर्फ शब्दभेद से दो बार कहा गया है।

विरोधाभास अलंकार :-जहाँ विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास दिया जाय, वहाँ ‘विरोधाभास अलंकार’ होता है।
जैसे- बैन सुन्या जबतें मधुर, तबतें सुनत न बैन।
यहाँ ‘बैन सुन्यों’ और ‘सुनत न बैन’ में विरोध दिखाई पड़ता है। सच तो यह है कि दोनों में वास्तविक विरोध नहीं है। यह विरोध तो प्रेम की तन्मयता का सूचक है।

S2. Ans.(c)
Sol.

S3. Ans.(a)
Sol. काव्यं ग्राह्ममलंकारात्। सौंदर्यमलंकार: – वामन)। चारुत्व को भी अलंकार कहते हैं। (टीका, व्यक्तिविवेक)। भामह के विचार से वक्रार्थविजा एक शब्दोक्ति अथवा शब्दार्थवैचित्र्य का नाम अलंकार है। (वक्राभिधेतशब्दोक्तिरिष्टा वाचामलं-कृति:।) रुद्रट अभिधानप्रकारविशेष को ही अलंकार कहते हैं। (अभिधानप्रकाशविशेषा एव चालंकारा:)। दंडी के लिए अलंकार काव्य के शोभाकर धर्म हैं (काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते)।

S4. Ans.(b)
Sol.

S5. Ans.(c)
Sol.

S6. Ans.(a)
Sol. उल्लेख अलंकार :-जहाँ एक वस्तु का वर्णन अनेक प्रकार से किया जाये, वहाँ ‘उल्लेख अलंकार’ होता है।
जैसे- तू रूप है किरण में, सौन्दर्य है सुमन में,
तू प्राण है पवन में, विस्तार है गगन में।

S7. Ans.(a)
Sol.

S8. Ans.(b)
Sol.

S9. Ans.(b)
Sol.

S10. Ans.(c)
Sol.


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