CTET 2019 Exam – Practice Hindi Misc. Questions Now | 19th October 2019_00.1
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CTET 2019 Exam – Practice Hindi Misc. Questions Now | 19th October 2019

CTET 2019 Exam – Practice Hindi Misc. Questions Now | 19th October 2019_40.1

हिंदी भाषा TET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTETKVS ,NVSDSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.TEACHERSADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।
निर्देश(1-5). नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। गद्यांश के अनुसार, दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। 
मनुष्य और किस्सागोई के नजदीकी संबंध के तीस-चालीस हजार वर्ष पुराने पुख्ता प्रमाण आज मौजूद हैं। बावजूद इसके कहानी कला के उद्गम की खोज के लिए यह अवधि बहुत नई है। हिमयुग की दहलीज पर ही मनुष्य समय बिताने, अनुभव साझा करने तथा संघर्षपूर्ण जीवन में मनोरंजन की भरपाई के लिए किस्से-कहानियों का सहारा लेने लगा था। तब तक वह अक्षर-ज्ञान से अनभिज्ञ था। बाकी कलाएं भी अल्प-विकास की अवस्था में थीं। खेती करना तक उसे नहीं आता था। पूरी तरह प्रकृति-आधारित जीवन में भोजन जुटाने का एकमात्र रास्ता था—शिकार करना। किसी कारण उसमें सफलता न मिले तो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध भोजन यथा कंद-मूल-फल आदि पर निर्भर रहना। प्राकृतिक आपदाओं, वनैले जीवों से भरपूर घने जंगलों में जैसे भी संभव हो, अपनी सांगठनिक एकता एवं संघर्ष के बल पर खुद की रक्षा करना। अपने संगठन-सामर्थ्य एवं परिस्थितिकीय सामंजस्य के हुनर के दम पर प्राचीन मनुष्य उन चुनौतियों से जूझता था। कभी सफल होता था, कभी असफल। प्राचीन वनाधारित यायावरी जीवन की वे सामान्य विशेषताएं थीं। उसमें जीत-हार लगी ही रहती थी। जीवन का हर नया अनुभव उसे रोमांचित करता। यदा-कदा हताशा के क्षण भी आते, किंतु मानवीय जिजीविषा के आगे उनका लंबे समय तक ठहर पाना संभव न था। या यूं कहो कि बुरे सपने की तरह उन्हें भुलाकर वह यायावर कर्मयोगी तुरंत आगे बढ़ जाता था। कठोर संघर्षमय जीवन तथा अनूठेपन से भरपूर अनिश्चित-सी स्थितियां मानवीय कल्पनाओं के नित नए वितान तैयार करती थीं। उन्हें सहेजकर दूसरों तक पहुंचाने, उनके माध्यम से समूह का मनोरंजन करने की चाहत ने किस्से-कहानियों को जन्म दिया। उस समय तक मनुष्य का स्थिर ठिकाना तो बना नहीं था। धरती का खुला अंचल और प्रकृति की हरियाली गोद उसे शरण देने को पर्याप्त थी। जंगल में शिकार का पीछा करते हुए आखेटी दल का यदा-कदा दूर निकल जाना; अथवा लौटते समय रास्ता भटककर जंगलों में खो जाना बहुत सामान्य बात रही होगी। फिर भी आखेट के लिए गए लोगों के वापस लौटने तक उनके वे परिजन जो बीमारी, वृद्धावस्था अथवा किसी अन्य कारण से आखेट पर न जा पाए हों, उनकी प्रतीक्षा में परेशान रहते होंगे। आकुल मनस्थितियों में समय बिताने के लिए समूह के सदस्यों के साथ अनुभव बांटना, धीरे-धीरे एक लोकप्रिय चलन बनता गया। मनोरंजन की उत्कट चाहत, जो उस संघर्षशील जीवन की अनिवार्यता थी, उत्प्रेरक का काम करती थी। आखेटी दल के लौटने पर समूह के बीच हर बार नए अनुभवों के साथ कुछ नए किस्से भी जुड़ जाते थे। अभियान सफल हो या असफल, आखेट से लौटे सदस्यों के पास अपने परिजनों को सुनाने के लिए भरपूर मसाला होता था। उनमें से कुछ वर्णन निश्चय ही दुख और हताशा से भरे होते होंगे, जिन्हें सुनकर समूह के सदस्यों की आंखें नम हो आती होंगी। फिर भी वे उनके यायावर जीवन का जरूरी हिस्सा थे और परिवार नामक संस्था के अभाव में, उन्हें एक होने की प्रतीति कराते थे। इसलिए शाम को भोजन के बाद अथवा फुर्सत के समय दिन-भर के रोमांचक अनुभवों का पिटारा समूह के सदस्यों के आगे खोल दिया जाता। उन्हें सुनने के लिए बूढ़ों-बच्चों सभी में होड़ मच जाती होगी। 
Q1. गद्यांश के अनुसार, हिमयुग के आरंभ के समय का मनुष्य संघर्षपूर्ण जीवन में मनोरंजन के लिए किसका सहारा लेता था? 
(a) यायावरी जीवन का, 
(b) आखेट का,
(c) शिक्षा का, 
(d) किस्से-कहानियों का 
Q2. गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य किस गुण के द्वारा अपनी चुनौतियों का सामना करता था? 
(a) संगठन-सामर्थ्य 
(b) परिस्थितिकीय सामंजस्य 
(c) (a) और (b) दोनों 
(d) शिकार के द्वारा 
Q3. गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य के संघर्षशील जीवन की अनिवार्यता क्या थी, जो उसके जीवन में उत्प्रेरक का कार्य करती थी? 
(a) खेती करना 
(b) मनोरंजन की उत्कट चाहत 
(c) भ्रमण करना 
(d) संगठन में रहना 
Q4. गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य के यायावर जीवन में किस संस्था का अभाव था? 
(a) न्याय संस्था 
(b) सामाजिक संस्था 
(c) धार्मिक संस्था 
(d) परिवार संस्था 
Q5. गद्यांश में वर्णित प्राचीन मनुष्य किस ज्ञान से अनभिग्य था? 
(a) किस्से-कहानियों के ज्ञान से 
(b) अक्षर-ज्ञान से 
(c) आखेट ज्ञान से 
(d) सामाजिक जीवन से 
Q6. अमित और अमीत का सही युग्म अर्थ होगा ?
(a) बहुत और शत्रु
(b) शत्रु और बहुत
(c) बहुत और मित्र
(d) शत्रु और साधु 
Q7. ‘विपिन’ का पर्यायवाची शब्द है- 
(a) वन 
(b) असुर 
(c) शिव 
(d) अमृत 
Q8. ‘उल्लास’ का संधि विच्छेद है- 
(a) उल् + आस 
(b) उल्ल + आस
(c) उल् + लास 
(d) उत् + लास 
Q9. किस शब्द की वर्तनी शुद्ध है?
(a) नेसर्गिक 
(b) नैसर्गिक 
(c) नैसर्गीक 
(d) नेसरर्गिक 
Q10. निम्नलिखित में से कौन-सा शुद्ध वाक्य है?
(a) माँ ने मुझे मुंबई बुलाया है। 
(b) तुम्हारी घड़ी में कै बजा है?
(c) मेरा नाम श्री मोहन जी है।
(d) उसे बोल दो की चला जाए। 
Solutions
S1. Ans. (d):
Sol. प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, हिमयुग के आरंभ के समय का मनुष्य संघर्षपूर्ण जीवन में मनोरंजन के लिए किस्से-कहानियों का सहारा लेता था। 
S2. Ans. (c):
Sol. प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य संगठन-सामर्थ्य एवं परिस्थितिकीय सामंजस्य के द्वारा अपनी चुनौतियों का सामना करता था। 
S3. Ans. (b):
Sol. प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य के संघर्षशील जीवन की अनिवार्यता मनोरंजन की उत्कट चाहत थी, जो उसके जीवन में उत्प्रेरक का कार्य करती थी। 
S4. Ans. (d):
Sol. प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य के यायावर जीवन में परिवार संस्था का अभाव था। 
S5. Ans. (b): 
Sol. प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, प्राचीन मनुष्य अक्षर-ज्ञान से अनभिज्ञ था। 
S6. Ans. (a): 
Sol. अमित और अमीत का सही युग्म ‘बहुत और शत्रु’ है। 
S7. Ans. (a):
Sol. ‘विपिन’ के पर्यायवाची शब्द हैं- वन, जंगल, कानन, अरण्य। 
S8. Ans. (d):
Sol. उल्लास का संधि-विच्छेद है: ‘उत् + लास’। 
S9. Ans. (b):
Sol. ‘नैसर्गिक’ – शुद्ध शब्द है। 
S10. Ans. (a):
Sol. शुद्ध वाक्य है- ‘माँ ने मुझे मुंबई बुलाया है’।                          


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