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Hindi Questions For DSSSB Exam : 21 July 2018 (Solutions)

Hindi Questions For DSSSB Exam : 21 July 2018 (Solutions)_30.1
हिंदी भाषा CTET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTET, KVS,NVS DSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.CTET ADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।
Q1. वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा सीखने, शब्दों को अर्थ देने में __________ की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
(a) भाषा-प्रयोगशाला 
(b) सामाजिक अंत:क्रिया
(c) विद्यालयी समय 
(d) पाठ्य-पुस्तकों 
Q2. भाषा सीखना और भाषा के बारे में सीखना 
(a) दो भिन्न संकल्पनाएँ हैं। 
(b) दो भिन्न संकल्पनाएँ नहीं हैं।
(c) विद्यालयी आकलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
(d) भाषा-विमर्श का हिस्सा नहीं है ।
Q3. भाषा-शिक्षण की किस विधि में लक्ष्य भाषा सिखाते समय मातृभाषा का प्रयोग नहीं किया जाता है? 
(a) व्याकरण विधि 
(b) अनुवाद विधि
(c) प्रत्यक्ष विधि 
(d) अप्रत्यक्ष विधि
Q4. भाषा अनुकरण के माध्यम से ही सीखी जाती है। यह विचार किससे सम्बद्ध है?
(a) स्किनर से।
(b) वाइगोत्स्की से 
(c) चॉम्स्की से
(d) पियाजे से 
Q5. भाषा सीखने में तब अधिक आसानी होती है जब
(a) पाठ्य-पुस्तक नहीं पढ़ाई जाती 
(b) बच्चों को समृद्ध भाषायी परिवेश उपलब्ध कराया जाए। 
(c) भाषा की परीक्षा नहीं होती।
(d) जब शिक्षक कहानी सुनाते हैं। 
Q6. व्याकरण-शिक्षण की अपेक्षाकृत बेहतर विधि है।
(a) आगमन विधि 
(b) निगमन विधि 
(c) सूत्र विधि
(d) पुस्तक विधि 
Q7. हिन्दी भाषा की कक्षा में सबसे महत्त्वपूर्ण है।
(a) पाठ्य-पुस्तक 
(b) परीक्षाएँ
(c) केवल पाठ्यचर्या-सहगामी क्रियाएँ
(d) बच्चों की भाषायी क्षमताओं में विश्वास 
Q8. भाषा हमें ____________व______________की अनोखी दुनिया में ले जाती है।
(a) समाज, कल्पना 
(b) कल्पना, विज्ञान
(c) ज्ञान, कल्पना 
(d) ज्ञान, समाज 
Q9. उच्च प्राथामिक स्तर पर भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में _____________की उपेक्षा बिलकुल नहीं की जा सकती।
(a) बच्चों के पाठ्य-पुस्तकीय ज्ञान 
(b) बच्चों की सामाजिक श्रेणी 
(c) शिक्षक के शास्त्रीय ज्ञान
(d) बच्चों की भाषिक पृष्ठभूमि 
Q10. व्याकरण-शिक्षण के संदर्भ में आपका बल किस बिन्दु पर होगा?
(a) व्याकरण के नियमों की सैद्धान्तिक विवेचना पर 
(b) व्याकरणिक की कोटियों की पहचान पर 
(c) व्याकरणिक नियमों को कंठस्थ करने पर
(d) व्याकरण के व्यावहारिक पक्ष पर 
Solutions
S1. Ans.(b) 
Sol. वाइगोत्स्की के अनुसार बच्चे परिवार तथा समाज की भाषा को अनुकरण के माध्यम से सीखते हैं। अत: भाषा सीखने की प्रक्रिया में सामाजिक अंत:क्रिया की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। 

S2. Ans.(a); 
Sol. भाषा अनुकरण आदि के माध्यम से स्वतः सीखी जा सकती है लेकिन उसके विषय में शिक्षण-विधि द्वारा । सीखा जाता है। अतः भाषा सीखना तथा भाषा के विषय में सीखना दोनों विभिन्न संकल्पनाएँ हैं। 
S3. Ans.(c); 
Sol. प्रत्यक्ष विधि के अंतर्गत लक्ष्य भाषा सिखाने के लिए मातृभाषा का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में विद्यार्थी लक्ष्य भाषा के सीधे संपर्क में आते हैं। यह भाषा-शिक्षण की व्यावहारिक विधि है। 
S4. (a) 
Sol. स्किनर का मानना है कि भाषा समाज तथा परिवार के अनुकरण से सीखी जाती है। बालक अनुकरण के
माध्यम से ही भाषा सीखता है। 
S5. Ans.(b); 
Sol. भाषा सीखने में परिवेश की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। परिवेश के माध्यम से बच्चों को भाषा सीखने में आसानी होती है। यदि कोई बच्चा अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहा है और उसका भाषायी परिवेश हिन्दी हो, तो उसे भाषा सीखने में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। भाषा सीखने में आसानी तभी होगी, जब बच्चे को शिक्षा माध्यम से संबंधित समृद्ध भाषायी परिवेश प्रदान किया जाए। इस प्रकार वह भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग कर सकता है। 
S6. Ans.(a); 
Sol. आगमन विधि के अंतर्गत-छात्र उदाहरणों के माध्यम से सामान्य नियमों का प्रयोग करते हैं। यह विधि व्याकरण-शिक्षण के लिए सर्वोत्तम है। पुस्तक विधि, सूत्र विधि या निगमन विधि इसकी अपेक्षाकृत कमजोर हैं। आगमन विधि के अंतर्गत छात्र स्वयं नियम प्रयोग करते हैं। 

S7. Ans.(d);
Sol. किसी भी भाषा की कक्षा के लिए आवश्यक है कि वह बच्चों की भाषायी क्षमता में विश्वास रखे। इससे बच्चे भाषा सीखने की ओर अग्रसर होंगे। 

S8. Ans.(c); 
Sol. भाषा हमें ज्ञान व कल्पना की अनोखी दुनिया में ले जाती है। ज्ञान व कल्पना को भाषा के माध्यम से ही अभिव्यक्त किया जा सकता है। 

S9. Ans.(d); 
Sol. उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा सीखने-सिखाने की कक्षा में बच्चों की भाषिक पृष्ठभूमि की उपेक्षा नहीं की जा सकती क्योंकि इसी आधार पर भाषा-शिक्षण को आगे बढ़ाया जा सकता है। बच्चों की भाषिक पृष्ठभूमि के आधार पर ही पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है। 

S10. Ans.(d); 
Sol. व्याकरण-शिक्षण में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण व्यावहारिक पक्ष है। क्योंकि व्यवहार में शामिल करने पर विषय आसानी से समझ में आ जाता है।