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CTET/UPTET 2019 Exam – Practice Hindi Pedagogy Questions Now | 1st November 2019

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हिंदी भाषा TET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTETKVS ,NVSDSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.TEACHERSADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।
Q1. किस प्रकार के प्रश्न बच्चों की भाषगत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते? 
(a) समान रूपरेखा वाले प्रश्न 
(b) संक्षिप्त प्रश्न 
(c) सरल भाषा में प्रयुक्त प्रश्न 
(d) अनुमानपरक प्रश्न
Q2. भाषा-शिक्षण में शब्दार्थ पर बल नहीं देना चाहिए क्योंकि- 
(a) कठिन शब्दों के अर्थ पुस्तक में दिए होते है। 
(b) श्रुतलेख में कठिन शब्दों के अभ्यास के दौरान छात्र उनके अर्थ जान लेते हैं। 
(c) पाठ की व्याख्या के दौरान अर्थ स्वतः स्पष्ट हो जाते है। 
(d) सभी छात्रों को शब्दार्थ की आवश्यकता नहीं होती।
Q3. निम्न में से कौन सा छात्रों में पठन कुशलता को हास का कारण नहीं है? 
(a) छात्र बहुत अधिक शब्दों से परिचित नहीं हें। 
(b) छात्रों के वाचन का उचित अभ्यास नहीं किया है। 
(c) दृष्टिकोण के कारण छात्र सही नहीं पढ़ पाता। 
(d) छात्र बहुत सावधानीपूर्वक पढ़ने का प्रयास करता है।
Q4. भाषा शिक्षण के संदर्भ में कौन सा कथन सही नहीं है? 
(a) भाषा शिक्षण में सर्वप्रथम मौखिक कार्य को प्रधानता दी जाती है। 
(b) स्वाभाविक क्रम में शिक्षण से छात्रों में आशातीत प्रगति होती है। 
(c) भाषा शिक्षण के संदर्भ में बच्चों को अधिक सक्रिय नहीं रखना चाहिए। 
(d) शिक्षण कार्य विभिन्न शिक्ष्ण सूत्रों के आधार पर होता है।
Q5. मौखिक अभिव्यक्ति के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। 
(a) छात्रों द्वारा कविता पाठ करना। 
(b) विभिन्न प्रकार के कथाओं का श्रवण। 
(c) परस्पर वार्तालाप द्वारा मौखिक अभिव्यक्ति करना। 
(d) छात्रों से पाठ्य पुस्तक से तथ्यात्मक प्रश्न पूछना। 
Q6. भाषा-अर्जन के संदर्भ में कौन सा कथन सही हे? 
(a) भाषा एक अर्जित कष्ट साध्य प्रक्रिया है। 
(b) भाषा-अर्जन सहज एवं स्वाभाविक होता है। 
(c) भाषा-अर्जन में हम ध्वनि संकेतों को लिपिबद्ध करते हैं। 
(d) यह हमारे अनुभवों की अभिव्यक्ति है। 
Q7. बच्चों में श्रवण कौशल एवं लेखन कौशल विकास करने के लिए आवश्यक है- 
(a) नियमित रूप से श्रुतलेख लिखवाना। 
(b) किसी गद्यांश की कुद पंक्तियाँ लिखवाना । 
(c) अनुलिपि के द्वारा लेख को सुधारना।
(d) छात्रों से शब्दों एवं वाक्यों की रचना करवाना।
Q8. भाषा शिक्षण में सहायक है- 
(a) व्याकरणिक नियमों का प्रयोग 
(b) साहित्यिक अभिरूचि 
(c) रचना कौशल 
(d) उच्चारण दोष 
Q9. अन्य विषयों की कक्षाएँ भी भाषा अधिगम में सहायता करती हैं क्योंकि- 
(a) अन्य विषयों का ज्ञान देने के लिए हम भाषा का प्रयोग करते है। 
(b) सभी शिक्षक भाषा के स्वरूप से परिचित होते है। 
(c) विषय के स्पष्टीकरण के लिए दिए उदाहरण भाषा की विधिता के सूचक हैं। 
(d) पाठ्य पुस्तकों का निर्माण भी भाषा शिक्षण के उद्देश्यों के अनुरूप होता हैं।
Q10. ‘मौन’ वाचन में मुख्यतः- 
(a) मन ही मन दत्तचित होकर पढ़ा जाता है। 
(b) धीमे स्वर मे एकाग्र होकर पढ़ते है। 
(c) बुदबुदाते हुए पढ़ते है। 
(d) सहपाठी के साथ मिलकर धीमे स्वर में पढ़ते है।
Solutions
S1. Ans.(a)
Sol. समान रूपरेखा वाले प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते हैं। 
S2. Ans.(c)
Sol. भाषा शिक्षण में पाठ की व्याख्या के दौरान शब्दार्थ पर बल नहीं देना चाहिए क्योंकि व्याख्या के दौरान अर्थ स्वतः स्पष्ट हो जाते है। 
S3. Ans.(d)
Sol. छात्रों में पठन कुशलता में ह्ास का कारण है- छात्रों द्वारा उचित अभ्यास न करना, अधिक शब्दों से परिचित न होना एवं दृष्टिदोष के कारण न पढ़ पाना। 
S4. Ans.(c)
Sol. भाषा शिक्षण के दौरान सर्वप्रथम मौखिक कार्य की प्रधानता, स्वाभाविक क्रय में शिक्षण, बच्चों की अधिक सक्रियता एवं शिक्षण कार्य विभिन्न शिक्ष्ण सूत्रों के आधार पर होना। 
S5. Ans.(b)
Sol. विभिन्न कथाओं का श्रवण मौखिक अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होता है। 
S6. Ans.(b)
Sol. भाषा-अर्जन सहज एवं स्वाभाविक होता है। 
S7. Ans.(a)
Sol. नियमित रूप से श्रुतलेख लिखवाना। 
S8. Ans.(a)
Sol. व्याकरणिक नियमों का प्रयोग भाषा शिक्षण में सहायक है। 
S9. Ans.(a)
Sol. अन्य भाषाओं का ज्ञान देने के लिए हम भाषा का प्रयोग करते है। इसलिए अन्य विषयों की कक्षाएँ भी भाषा अधिगम में सहायता करती है। 
S10. Ans.(a)
Sol. मौन वाचन में मुख्यतः मन ही मन दत्तचित्त होकर पढ़ा जाता है।

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