Home   »   CTET/ UPTET/ DSSSB 2019 Exam –...

CTET/ UPTET/ DSSSB 2019 Exam – Practice Hindi Questions Now | 23rd September 2019

CTET/ UPTET/ DSSSB 2019 Exam – Practice Hindi Questions Now | 23rd September 2019_30.1

हिंदी भाषा TET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTETKVS ,NVSDSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.TEACHERSADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है।

Q1. ‘अभिधेयार्थ’ वाचक शब्दों का सम्बन्ध किससे है?
(a) प्रेरणात्मकता से
(b) परिमाणवाचकता से
(c) इन सभी से
(d) मूलार्थ व्यंजकता से

Q2. ‘निष्क्रिय’ शब्द का विपरीतार्थक लिखिए।
(a) अक्रिय
(b) सक्रिय
(c) क्रियान्वयन
(d) क्रियान्वित

Q3. हिन्दी में ‘कृत् प्रत्ययों’ की संख्या कितनी है?
(a) तीस
(b) अठ्ठाईस
(c) पचास
(d) चालीस

Q4. “में खाना खा चका हूँ।” इस वाक्य में भूतकालिक भेद इंगित कीजिएः
(a) सामान्य भूत
(b) पूर्ण भूत
(c) आसन्न भूत
(d) संदिग्ध भूत

Q5. ‘वृत्’ धातु में ‘ण्मुल्’ प्रत्यय लगने पर शब्द रूप क्या होगा?
(a) वृतं
(b) वर्तं
(c) व्रतं
(d) व्रातं

Q6. ‘कृष्ण ने गाना गाया’ वाक्य में कारक है-
(a) कर्म
(b) सम्बोधन
(c) सम्प्रदान
(d) कत्र्ता

Q7. स्वतंत्र सत्ता धारण न करने वाले शब्द क्या कहलाते हैं?
(a) रूढ़
(b) योगरूढ़
(c) यौगिक
(d) इनमें से कोई नहीं

Q8. पत्र में अपने से बड़े के लिए संबोधन शब्द हैं-
(a) प्रिय
(b) श्रद्धेय
(c) चिरंजीवी
(d) आयुष्मान

Q9. पत्र में अपरिचितों को संबोधित करने के लिए उपयुक्त शब्द है-
(a) प्रिय महोदय
(b) आदरणीय
(c) श्रीमान्
(d) इनमें से कोई नहीं

Q10. ‘ँ’ चिह्न का नाम क्या है?
(a) अनुस्वार
(b) अयोगवाह
(c) अनुनासिक (चन्द्रबिन्दु)
(d) हल्

Solutions

S1. Ans.(d)

Sol. वाक्य के मुख्य अर्थ का बोध कराने वाली शब्द शक्ति को अभिधा कहते हैं। अभिधा शक्ति से निकलने वाले अर्थ को अभिधेयार्थ कहते हैं। इसीलिए अभिधेयार्थ वाचक शब्दों का सम्बन्ध-मूलार्थ व्यंजकता से होता है।

S2. Ans.(b)

Sol.

S3. Ans.(b)

Sol. जो शब्दांश शब्दों के अंत में जुड़कर उनमें परिवर्तन ला देते हैं वे प्रत्यय कहलाते हैं। प्रत्यय के दो भेद होते हैं- (1) कृत् प्रत्यय (2) तद्धित प्रत्यय। वे प्रत्यय जो धातु में जोड़े जाते हैं, कृत प्रत्यय कहलाते हैं। कृत् प्रत्यय से बने शब्द कृदंत (कृत्+अंत) शब्द कहलाते हैं। कृत् प्रत्ययों की संख्या अठ्ठाईस है, ये निम्न प्रकार हैः- अक, अन, अना, आई, इत, इत्र, ई, उक, ति, दान, नाक एवं बाज आदि।

S4. Ans.(b)

Sol. जिस शब्द से किसी कार्य का होना समझा जाए, उसे क्रिया कहते हैं। काल के आधार पर क्रिया के तीन भेद होते हैं- (1) वर्तमान काल (2) भूत काल (3) भविष्यत् काल। भूतकाल के आधार पर क्रिया के छः भेद हैं- समान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत, हेतुहेतुमद्भूत। “मैं खाना खा चुका हूँ।” वाक्य में ‘पूर्ण भूत’ है।

S5. Ans.(c)

Sol. वे शब्दांश जो धातु या शब्द के अन्त में जुड़कर शब्द का अर्थ परिवर्तन कर देते हैं उन्हें प्रत्यय कहते हैं। ‘वृत्त्’ धातु में ‘ण्मुल्’ प्रत्यय लगाने से ‘व्रतं’ शब्द रूप बनेगा।

S6. Ans.(d)

Sol. संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य पदों से जो सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ (8) मानी गई है। कत्र्ता-‘ने’; कर्म-को; करण-से; सम्प्रदान-के लिए; अपादान-से; संबंध-का, की, के; अधिकरण-में, पर; सम्बोधन-ऐ! हे! ।‘कृष्ण ने गाना गाया’ वाक्य में ‘कत्र्ता’ कारक है।

S7. Ans.(c)

Sol. रचना के आधार पर शब्द तीन प्रकार के हैं- रूढ़ यौगिक एवं योगरूढ। रूढ़ शब्द-ये मूल शब्द हैं। इन शब्दों के खंड सार्थक नहीं होते है, जैसे- नाक, कान आदि। यौगिक शब्द – दो या दो से अधि क रूढ़ शब्दों के योग से यौगिक शब्द बनते हैं, जैसेः- दिन-रात। योगरूढ़ शब्द-ऐसे शब्द जो यौगिक तो होते हैं, पर अर्थ के विचार से अपने सामाम्य अर्थ को छोड़कर दूसरा विशेष अर्थ प्रकट करते हैं, योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं, जैसेः पंकज।

S8. Ans.(b)

Sol. पत्र में अपने से बड़ों के लिए सम्बोधन शब्द श्रद्धेय, आदरणीय एवं पूज्य आदि लिखते हैं एवं पत्र के अन्त में आपका प्रिय एवं स्नेहाधीन लिखते हैं। पत्र में अपने से छोटे के लिए पिता-माता चिरंजीवी, प्रिय एवं आयुष्मान शब्द संबोध न के लिए प्रयोग करते हैं।

S9. Ans.(a)

Sol. पत्र लिखते समय अपरिचितों के लिए ‘प्रिय महोदय’ शब्द का सम्बोधन के लिए आदरणीय शब्द का प्रयोग करते हैं।

S10. Ans.(c)

Sol. ‘ँ’ चिन्ह अनुनासिक (चंद्रबिन्दु) है, अनुनासिक वे स्वर ध्वनियाँ होती हैं, जिनके उच्चारण में हवा नाक से भी निकलती है, जैसे-अँ, आँ, इँ आदि। अयोगवाह → अनुस्वार (÷) और विसर्ग (:) को स्वरों के साथ रखा जाता है किन्तु ये स्वर ध्वनियाँ नहीं हैं क्योंकि इनका उच्चारण व्यंजनों के उच्चारण की तरह स्वर की सहायता से होता है लेकिन ये व्यंजन भी नहीं है। इसलिए इन्हें अयोगवाह कहते हैं।

You can learn Hindi with our YouTube Channel, Watch Now:


Sharing is caring!

Thank You, Your details have been submitted we will get back to you.